व्यापार

टेलीकॉम कंपनियों के घाटे ने बढ़ाई बैंकों की टेंशन, डिफॉल्‍ट का डर

बीते दिनों देश की दो बड़ी टे‍लीकॉम कंपनियां- एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी हुए. इन नतीजों में दोनों कंपनियों को अब तक का सबसे बड़ा घाटा हुआ है. ऐसे में अब इन कंपनियों को कर्ज देने वाले बैंकों की टेंशन बढ़ गई है. दरअसल,  पहले से ही नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) की वजह से तनाव में चल रहे बैंकिंग सेक्‍टर को डिफॉल्ट की आशंका है. डिफॉल्ट से बैंकों का एनपीए बढ़ने का खतरा होगा. इसके अलावा, म्यूचुअल फंड इंडस्‍ट्री भी प्रभावित हो सकता है.

बैंकिंग इंडस्‍ट्री को खत्म करने की तैयारी!

बिजनेस टुडे से बातचीत के दौरान नाम न छापने कr शर्त पर एक बैंकर ने कहा, ”यह सिर्फ एक कंपनी के घाटे का सवाल नहीं है. इसके तहत बैंकिंग इंडस्‍ट्री को खत्म करने की तैयारी चल रही है. टेलीकॉम कंपनियों की ओर से दूरसंचार विभाग (DoT) को दी जाने वाली बकाया कर्ज राशि और बैंक गारंटी बड़ी है.” 

बैंकर ने आगे कहा,  ”सरकार डिफॉल्‍ट को मंजूरी देती है या फिर नया रास्‍ता खोलती है, अब गेंद सरकार के पाले में है. सरकार को डिफॉल्ट की संभावना न्यूनतम रखने की कोशिश करनी चाहिए.” इसके साथ ही बैंकर ने चेतावनी दी कि अगर डिफॉल्ट होता है, तो हम कुछ भी नहीं वसूलेंगे. बैंकर ने एयरसेल और आरकॉम के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि वे पैसे वसूलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इस बीच, वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि टेलीकॉम सेक्‍टर पर बकाया को लेकर किसी भी बैंक ने वित्त मंत्रालय को अपनी चिंता जाहिर नहीं की है.

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