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रामोजी फ़िल्म सिटी: यहां है बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के मनोरंजन का पूरा इंतजाम

रामोजी फिल्म सिटी भारत में उन लोगों के लिए बेहतरीन ट्रैवल डेस्टिनेशन है जो कुछ अलग हटकर ट्रैवल करना चाहते हैं। बीच, पहाड़ और नैचुरल ब्यूटी से अलग यहां आपको मेन मेड ब्यूटी देखने को मिलेगी। रामोजी फिल्म सिटी में आप एक ही स्थान पर पूरी दुनिया घूम सकते हैं क्योंकि यहां कई स्थानों की हूबहू नकल की गई है। कई फिल्मों के सेट आज भी यहां लगे हुए हैं। यहां बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के मनोरंजन का पूरा इंतजाम है। यहां हम आपको रामोजी फिल्म सिटी के प्रमुख आकर्षणों की जानकारी दे रहे हैं।
रामोजी फ़िल्म सिटी  आंध्र प्रदेश राज्य में हैदराबाद शहर के हयातनगर में स्थित है। पर्यटकों की यात्रा हैदराबाद आने के बाद तब तक पूरी नहीं होती, जब तक वह रामोजी फ़िल्म सिटी घूम न लें। रामोजी फ़िल्म सिटी लगभग 2000 एकड़ में फैली हुई है। यह अद्भुत कल्पनालोक का बेजोड़ नमूना है। वैसे तो यह फ़िल्मों की शूटिंग का केंद्र है, लेकिन पर्यटकों को लुभाने के लिए यहाँ पर ड्रीम वैली, अंब्रेला गार्डन, एनिमल गार्डन, जापानी गार्डन वगैरह हैं। यहाँ फोटो खिंचवाने के लिए लुभावने सेट्स भी हैं। यहाँ बच्चों के लिए एक स्पेशल फन पार्क है, जहाँ की सैर बड़ों को भी बहुत लुभाती है।

स्थापना
हैदराबाद स्थित रामोजी फ़िल्म सिटी, भारतीय और विदेशी सिनेमा निर्माण की आज एक अग्रणी संस्था बन गई है। इसकी स्थापना रामो जी राव नामक एक उद्योगपति ने सन 1996 में की थी। रामोजी राव पत्रकारिता, वित्त प्रबंधन और सिनेमा निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं।

तकनीकी सुविधाएँ
रामोजी फ़िल्म सिटी दो हजार एकड़ में कृत्रिम रूप से निर्मित उद्यान वनों, राजप्रासादों, ऐतिहासिक इमारतों के प्रतिरूपों, अत्याधुनिक पाश्चात्य शैली के निर्माणों, महलों, किलों आदि की भव्यता धारण किए हुए फैला है। तीन पाँच सितारा होटल और अन्य तरह की आवासीय सुविधाओं से सुसंपन्न यह निर्माण सस्ता देश–विदेश के फ़िल्म निर्माताओं के लिए एक वरदान है। यहाँ ई टीवी के भारतीय भाषाओं के स्टूडियो भी स्थित हैं। इस संस्था में प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में फ़िल्में निर्मित होती हैं। हर तकनीकी व्यवस्था से लैस होने के कारण निर्माता-निर्देशकों को कहीं और उसे तलाशने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। हॉलीवुड के फ़िल्म निर्माता भी रामोजी फ़िल्म सिटी की ओर फ़िल्म निर्माण के लिए आकर्षित हो चुके हैं।

फ़िल्म निर्माण
रामोजी राव स्वयं भी एक उत्तम कोटि के फ़िल्म निर्माता हैं। उन्होंने लगभग 80 फ़िल्में तेलुगु, तमिल, हिंदी, कन्नड़, मराठी और बंगाली भाषाओं में सफलतापूर्वक बनाई हैं। हैदराबाद में अन्य फ़िल्म निर्माण संस्थाओं में 'अन्नपूर्णा स्टूडियो', 'पद्मालया स्टूडियो' प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं। अन्नपूर्णा स्टूडियो की स्थापना तेलुगु सिनेमा के युग-पुरुष डॉ. अक्कीनेनी नागेश्वर राव द्वारा 1970 में की गई थी। तेलुगु फ़िल्म उद्योग को स्वतंत्र अस्मिता दिलाने के लिए उन्होंने मद्रास से तेलुगु फ़िल्म उद्योग को निकालकर तेलुगु प्रदेश, हैदराबाद में स्थानांतरित किया। उनका यह योगदान ऐतिहासिक महत्व का है। अन्नपूर्णा स्टूडियो में देश के सभी भाषाओं की फ़िल्में तकनीकी प्रक्रिया के लिए आती हैं। अक्कीनेनी नागेश्वर राव की मृत्यु के बाद उनके अभिनेता पुत्र नागार्जुन इस स्टूडियो के संरक्षक हैं।

दक्षिण भारतीय संस्थाओं का योगदान
हिंदी फ़िल्म निर्माण में दक्षिण भारतीय निर्माण संस्थाओं का योगदान महत्वपूर्ण है। हिंदी सिनेमा निर्माण ने उत्तर और दक्षिण की दूरियों को ख़त्म किया है। हिंदी के दिग्गज कलाकारों ने दक्षिण में बनी हिंदी फ़िल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसी तरह दक्षिण के कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं ने हिंदी सिनेमा के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय एकता की दृष्टि से यह साझा प्रयास प्रशासनीय है। भारतीय सिनेमा के प्रोन्नयन में समूचे देश का योगदान है, जिसे विस्मृत नहीं किया जा सकता।

साठ के दशक में फ़िल्म निर्माण
साठ के दशक से फ़िल्म निर्माता स्वतंत्र रूप से फ़िल्म बनाने लगे थे। उससे पहले फ़िल्में स्टूडियो के मालिक ही कलाकारों को मासिक वेतन पर नियुक्त करके फ़िल्में बनाते थे। फ़िल्म की पटकथा लेखक, संगीत निर्देशक, निर्देशक एवं नायक-नायिका आदि कलाकार सभी निर्माण संस्था के वेतन-भोगी लोग ही होते थे। ये इन संस्थाओं से अनुबंधित होते थे, इसलिए इन्हें अनुबंधित काल में अन्य संस्थाओं में काम करने की स्वतन्त्रता नहीं होती थी। सन साठ के दशक से यह परंपरा टूटी और निर्माता भी आज़ादी से अपनी फ़िल्में बनाने लगे।

फ़िल्मों के निर्माण में फ़िल्म कंपनियों का एकाधिकार समाप्त हुआ। इसके बदले में फ़िल्म स्टूडियो निर्माताओं को भाड़े पर उपलब्ध कराए जाने की पद्धति शुरू हुई, जो आज भी मौजूद है। आज कोई भी निर्माता किसी भी फ़िल्म स्टूडियो में अपनी फ़िल्म बना सकता है। कलाकार भी अनुबंध के बंधन से मुक्त हैं। इस तरह से एक नए युग का प्रारम्भ हुआ। भारत फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में विश्व में एक शक्तिशाली देश बनाकर उभरा है। भारत में फ़िल्म निर्माण की सभी तकनीकी सुविधाएँ अत्याधुनिक स्तर पर उपलब्ध हैं।
मूवी मैजिक पार्क

मूवी मैजिक पार्क में आप काफी एंजॉय कर सकते हैं। यहां आपको कई जादुई अनुभव भी मिलेंगे। यहां आप भूकंप का अहसास कर सकते हैं, तेजी से नीचे गिरने का अनुभव कर सकते हैं।

किड्स पार्क
अगर आप बच्चों को लेकर रामोजी फिल्म सिटी घूमने आए हैं तो किड्स पार्क में जाना न भूले। यहां बच्चों के मनोरंजन का पूरा इंतजाम है। यहां बच्चों के लिए कई राइड्स हैं। बच्चों को इन झूलों पर झूलना काफी पसंद आएगा।

फिल्मी दुनिया
यह रामोजी फिल्म सिटी का वो हिस्सा है जो आपको दुनियाभर की सैर कराएगा। यहां आप पेरिस और बैंकॉक की गलियों जैसी बनाई गई गलियों में घूम सकते हैं या अलीबाबा और चालीस चोर के सेट को करीब से देख सकते हैं। यहां आकर आपको अहसास होगा कि आप किसी जादुई दुनिया में आ गए हैं।

कृपालु केव
अगर आप प्राकृतिक शांति का अहसास करना चाहते हैं तो रामोजी फिल्म सिटी में स्थित कृपालु केव में जरूर जाएं। यहां भगवान बुद्ध की एक बड़ी मूर्ति भी लगी है। यह कला का एक बेहतरीन नमूना है।

बटरफ्लाइ पार्क
यहां आपको दुनिया की सबसे खूबसूरत और अलग-अलग किस्म की तितलियां देखने को मिलेंगी। पार्क के अंदर आपको अपने आसपास तरह-तरह की रंगबिरंगी तितलियां उड़ती हुई नजर आएंगी। यह एक खूबसूरत नजारा है जो आपको केवल रामोजी फिल्म सिटी में ही देखने को मिलेगा।

कैसे पहुंचे
रामोजी फिल्म हैदराबाद हवाई अड्डे से करीब 40 किलोमीटर दूर है। रामोजी फिल्म सिटी पहुंचने के लिए पहले आपको हैदराबाद पहुंचना होगा।

हवाई मार्ग- हैदराबाद में राजीव गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट है जहां के लिए देश के सभी बड़े शहरों से सीधी उड़ान उपलब्ध है।


रेलमार्ग- हैदराबाद शहर देश के सभी प्रमुख शहरों से रेलमार्ग के जरिए सीधा जुड़ा है इसलिए ट्रेन के जरिए पहुंचने में यहां कोई परेशानी नहीं है।

सड़क मार्ग- हैदराबाद के पड़ोसी शहरों से आप नैशनल हाइवे 9 और नैशनल हाइवे 7 के जरिए पहुंच सकते हैं इसके अलावा हैदराबाद तक नजदीकी शहरों से सीधी बस सेवा भी उपलब्ध है।

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