यात्रा वृतांत

यहां हीरों की खान के साथ देखिए बाघों के संरक्षण केंद्र

मध्य प्रदेश का पन्ना केवल नायाब हीरों की खानों के लिए ही नहीं बल्कि बाघ सरंक्षण के केंद्र के रूप में भी प्रसिद्ध है। यदि आप भी जंगलों में सैरसपाटा करने के शौकीन हैं तथा वन्य जीवन को करीब से देखना चाहते हैं तो आपका स्वागत है म.प्र. के पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में। यहाँ आपको देश में विलुप्ति की कगार पर खड़े बाघ शान से चहलकदमी करते दिखाई देंगे। भारत के टाईगर रिर्जव प्रोजेक्ट का एक हिस्सा पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भी है।कला प्रेमी व प्रकृति प्रेमियों को एक बार अवश्य पन्ना जाना चाहिए पन्‍ना राष्‍ट्रीय उद्यान खजुराहो से महज़ 57 किमी की दूरी पर है। इसे 1981 में बनवाया गया और 1994 में इसे बाघ आरक्षित परियोजना घोषित कर दिया गया था। विंध्‍या की पहाडियों में पन्‍ना और छतरपुर जिले में बना पन्‍ना नैशनल पार्क जंगली बिल्‍ली, हिरण, गिद्द, भेडिया, चिंकारा और चीते के लिए मशहूर है।

इस पार्क को भारत के सबसे व्‍यवस्थित राष्‍ट्रीय उद्यानों में 2007 में ‘उत्‍कृष्‍टता पुरस्‍कार’ मिल चुका है। इस नेशनल पार्क के बारे में कहा जाता है कि यहाँ पांडव अपने वनवास के दौरान रहे थे। यह पार्क पहले के जमाने में पन्ना के राजघराने के लोगों के लिए शिकार का प्रमुख केंद्र था। आजादी के बाद इसे वाइल्ड लाइफ सेन्च्यूरी घोषित किया गया था। इसे सन 1981 में नेशनल पार्क का दर्जा दिया।प्राचीन समय में पन्‍ना, छतरपुर और बिजावर राज्‍यों के शासक इस क्षेत्र में शिकार किया करते थे। मान्‍यता है कि पांडवों ने भी अपने वनवास का अत्‍यधिक समय पन्‍ना में बिताया था एवं इस बात का जिक्र महाभारत ग्रंथ में भी मिलता है।पार्क से होकर गुजरने वाली नदी पार्क की खूबसूरती में चार चाँद लगा देती है। यहाँ नाव में बैठकर जंगली जीवों को करीब से देखने का आनंद ही कुछ होता है। पार्क के मुख्य आकर्षणों में एक आकर्षण खूबसूरत पांडव झरना है, जोकि झील में गिरता है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान यहाँ विश्राम किया था। इसके अलावा अन्य आकर्षणों में एक राजगढ़ पैलेस है, जो कि कला व शिल्प का अद्भुत नमूना है। इस पार्क में पक्षियों की लगभग 200 से अधिक प्रजातियाँ है, जिनमें प्रवासी पक्षी भी सम्मिलित है।

पन्‍ना नैशनल पार्क घूमने का क्‍या है सही समय

पन्‍ना में जुलाई से अक्‍टूबर के आखिर तक मॉनसून का मौसम रहता है। मॉनसून के दौरान ये पार्क बंद रहता है क्‍योंकि इस दौरान यहां के रास्‍ते काफी खराब हो जाते हैं। ये पार्क 16 अक्‍टूबर से 30 जून तक पर्यटकों के लिए खुलता है। हालांकि पन्‍ना नैशनल पार्क घूमने के लिए नवंबर से अप्रैल यानि सर्दी का मौसम सबसे ठीक रहता है। यहां का मौसम ज्‍यादातर ठंडा ही रहता है और गर्मियों के मौसम में भी यहां उमस नहीं होती है। इस वजह से पन्‍ना नैशनल पार्क का मौसम हमेशा सुहावना रहता है। कभी-कभी गर्मी के मौसम में यहां का तापमान 41 डिग्री तक भी पहुंच जाता है। इस मौसम में आने पर आप कुछ ऐसे जानवर भी देख सकते हैं जो पानी की तलाश में यहां आते हैं।

कैसे पहुंचे पन्‍ना नैशनल पार्क
वायु मार्ग : पन्‍ना से खजुरा हो एयरपोर्ट सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। हालांकि जबलपुर एयरपोर्ट से भी पन्‍ना के लिए फ्लाइट चलती हैं।
रेल मार्ग : पन्‍ना से निकटतम रेलवे स्‍टेशन सतना रेलवे स्‍टेशन है। ये स्‍टेशन देशभर के शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग : मध्‍य प्रदेश के अन्‍य शहरों से भी पन्‍ना अच्‍छी तरह से जुड़ा हुआ है।

क्या देखें

पन्‍ना नेशनल पार्क पन्‍ना नैशनल पार्क का मुख्‍य आकर्षण टाइगर्स हैं।पन्ना नेशनल पार्क के मुख्य आकर्षण बाघ, चौसिंगा हिरण, चिंकारा, सांभर, जंगली बिल्ली, घड़ियाल, मगरमच्छ, नीलगाय आदि हैं। हालांकि यहां पर और भी कई जानवर और पक्षियों को देख सकते हैं। पार्क में समुद्री जीव भी देखने को मिलते हैं क्‍योंकि इस पार्क के पास ही केन नदी बहती है। यहां आप पानी में यूरासियन ईगल, उल्‍लू, ब्‍लैक इबिस, मगरमच्‍छ और घडियाल देख सकते हैं। कई तरह के सांप जैसे पायथॉन और किंग कोबरा भी नज़र आ जाएंगें। चीता, स्‍लोथ बियर, चिंकारा, नील्‍गई, सांबर और जंगली बिल्‍ली आदि भी इस जगह पर देखे जा सकते हैं।

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