यात्रा वृतांत

जानिए राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन के बारें में

माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। माउंट आबू को राजस्थान का स्‍वर्ग भी माना जाता है। माउंट आबू में अनेक पर्यटन स्थल हैं। माउंट आबू हिन्दू और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है। माउंट आबू के ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक ख़ूबसूरती पर्यटको को अपनी ओर खींचती है। इनमें कुछ पर्यटन स्थल शहर से दूर हैं तो कुछ शहर के आसपास ही हैं। माउंट आबू दर्शन के लिए पर्यटन विभाग द्वारा निजी बस ऑपरेटरों द्वारा साइटसीन टूर चलाए जाते हैं। ये टूर आधे दिन के होते हैं। वैसे जीप या टैक्सी द्वारा भी आबू भ्रमण किया जा सकता है। राजस्थान पर्यटन का कार्यालय बस स्टैंड के सामने है। जहाँ से यहाँ की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। शहर के अंदर या पास के स्थान पैदल घूमते जा सकते हैं। कंडक्टेड टूर में हर स्थान पर सीमित समय ही दिया जाता है।

माउंट आबू कों दिलवाड़ा के मंदिरों के अलावा अन्य कई ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। वैसे तो साल भर पर्यटनों का जमावड़ा यहां रहता हैं। लेकिन गर्मियों के मौसम में पर्यटकों की संख्या में इजाफ़ा हो जाता है। गुरु शिखर, सनसेट प्वाइंट, टोड रॉक, अचलगढ़ क़िला और नक्की झील प्रमुख आकर्षणों में से हैं। यहां की साल भर रहने वाली हरियाली पर्यटकों को ख़ासी भाती है। इसका निर्माण झील के आसपास हुआ है और चारों ओर से यह पर्वतीय क्षेत्र जंगलों से घिरा है।
माउंट आबू के प्रमुख पर्यटन स्थल
दिलवाड़ा जैन मंदिर

दिलवाड़ा जैन मंदिर का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था।यह शानदार मंदिर जैन धर्म के र्तीथकरों को समर्पित हैं।जैन मंदिर स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने है। पाँच मंदिरों के इस समूह में विमल वासाही टेंपल सबसे पुराना है।दिलवाड़ा जैन मंदिर में श्वेत संगमरमर के गुंबद का भीतरी भाग, दीवारें, छतें तथा स्तंभ अपनी महीन नक़्क़ाशी और अभूतपूर्व मूर्तिकारी के लिए संसार-प्रसिद्ध हैं।
नक्की झील

माउंट आबू के मध्य में स्थित यह झील माउंट आबू का सबसे पहला आकर्षण का केन्द्र है।
नक्की झील माउंट आबू का दिल है।नक्की झील में सर्दियों में अक्सर बर्फ़ जम जाया करती है।नक्की झील में नौका विहार की भी व्यवस्था है।
गोमुख मंदिर

गोमुख मंदिर के परिसर में गाय की एक मूर्ति है जिसके सिर के ऊपर प्राकृतिक रूप से एक धारा बहती रहती है।
मंदिर में अरबुआदा सर्प की एक विशाल प्रतिमा है।संगमरमर से बनी नंदी की आकर्षक प्रतिमा को भी यहाँ देखा जा सकता है।
अर्बुदा-देवी मन्दिर

अर्बुदा-देवी का मन्दिर माउंट आबू की पहाड़ के ऊपर स्थित है।अर्बुदा-देवी मन्दिर का पुराना नाम नंदिवर्धन था।जैन ग्रन्थ विविधतीर्थकल्प के अनुसार आबूपर्वत की तलहटी में अर्बुद नामक नाग का निवास था, इसी के कारण यह पहाड़ आबू कहलाया।
अचलगढ़ क़िला व मंदिर

दिलवाड़ा के मंदिरों से 8 किलोमीटर उत्तर पूर्व में यह क़िला और मंदिर स्थित हैं।पहाड़ी के तल पर 15वीं शताब्दी में बना अचलेश्वर मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है।
सनसेट प्वाइंट

सनसेट प्वांइट से डूबते हुए सूरज की ख़ूबसूरती को देखा जा सकता है।यहाँ से दूर तक फैले हरे भरे मैदानों के दृश्य आँखों को सुकून पहुँचाते हैं।
माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य मांउट आबू का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।
यहाँ मुख्य रूप से तेंदुए, स्लोथबियर, वाइल्ड बोर, सांभर, चिंकारा और लंगूर पाए जाते हैं।
गुरु शिखर

गुरु शिखर अरावली पर्वत शृंखला की सबसे ऊँची चोटी है।गुरु शिखर से कुछ पहले विष्णु भगवान के एक रूप दत्तात्रेय का मंदिर है।
शिखर पर एक ऊँची चट्टान है और एक बड़ा-सा प्राचीन घंटा लगा है।

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