पर्यटन यात्रा वृतांत

प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है ये स्थल

तहसका, एमपी-सीजी। ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्यता से भरा जलपाईगुड़ी भारत के पश्चिम बंगाल राज्य का एक जिला है। यह राज्य के उत्तर में स्थित है और उत्तर बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा शहर भी है। यह शहर महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि यह देश के बाकी राज्यों को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने का काम करता है। भौगोलिक दृष्टि से यह पश्चिम बंगाल का एक शानदार स्थल है जहां प्रकृति ने अपना खजाना दिल खोल कर लुटाया है। यह स्थल प्रकृति प्रेमी से लेकर एडवेंचर के शौकीन सभी को यहां आने का आमंत्रण प्रदान करता है। इसलिए, जलपाईगुड़ी प्रकृति से प्यार करने वाले ट्रैवलर्स के लिए एक स्वर्गीय निवास है। इस खास लेख में जानिए पर्यटन के लिहाज से यह शहर आपके लिए कितना खास है।

हिंदी में जलपाई का मतलब होता है जैतून। जलपाईगुड़ी में 1990 के दशक में बड़ी संख्या में जैतून पाए जाते थे। इसके अलावा सिलीगुड़ी और पश्चिम बंगाल के उत्तरी शहरों में आने वाले पर्यटक जलपाईगुड़ी भी आते हैं। जलपाईगुड़ी और आसपास के पर्यटन स्थल यहां के चर्चित आकर्षणों में जुबली पार्क, टाउन क्लब स्टेडियम और तीस्ता नदी प्रमुख है। बच्चों के लिए कराला नदी के किनारे पर बना तीस्ता पार्क एक आदर्श स्थान है। जलपेश मंदिर शहर से 15 किमी दूर है और इस क्षेत्र में एक प्रसिद्ध शिव मंदिर भी है। यहां एक नेशनल पार्क भी है जो शहर से 80 किमी दूर है।

संगचोएलिंग मठ

संगचोएलिंग मठ पहाड़ी की चोटी पर स्थित है जहाँ तक घने जंगलों से 4 किमी. पैदल चलकर पहुँचा जा सकता है। इस मठ का निर्माण 17 वीं शताब्दी में लामा ल्हात्सुं चेम्पो ने किया था। यह मठ गुप्त मंत्रों के स्थान के लिए जाना जाता है। यहाँ 17 वीं शताब्दी की मिट्टी की मूर्तियों का उत्कृष्ट संग्रह है। यद्यपि इस मठ में कई बार आग लग चुकी है, प्रत्येक बार इसका पुन: निर्माण किया गया।

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गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान

 गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान जलपाईगुड़ी के डूअर्स क्षेत्र में स्थित है। हिमालयी तलहटी में बसा यह राष्ट्रीय उद्यान वनस्पतियों और जीवों के साथ एक समृद्ध वन्य क्षेत्र है। यह लातगुड़ी से 15 किमी, चल्सा से 10 किमी और जलपाईगुड़ी शहर से 52 किमी दूर पर स्थित है। जंगली जीवों में आप यहां हाथी, तेंदुआ, हॉर्नबिल्स, जंगली सूअर, राइनों आदि को देख सकते हैं। इसके अलावा आप यहां 193 पक्षियों की प्रजातियां, कछुए की 7 प्रजाती, सरीसृप की 22 और मछली की 22 प्रजातियों को देख सकते हैं।

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वन्यजीव अभयारण्य

 गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान के अलावा आप यहां जलदापारा वन्यजीव अभयारण्य की सैर का प्लान बना सकते हैं। यह अभयारण्य पूर्वी हिमालय की तलहटी पर टोरसा नदी के किनारे बसा है। जिसमें वेट-फॉरेस्ट, रिवर-फॉरेस्ट और ड्राई मिक्स फॉरेस्टे से घिरे घास के मैदानों का विशाल विस्तार शामिल है। पश्चिम बंगाल के इस अभयारण्य में एक-सींग वाले गैंडे की आबादी ज्यादा है। इसके अलावा आप यहां जंगली जीवों में रॉयल बंगाल टाइगर, तेंदुआ, हॉग हिरण, भौंकने वाली हिरण, सांभर और चीता आदि शामिल हैं। सर्दियों के दौरान यहां विभिन्न प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है। अभयारण्य की सैर के लिए यहां जीप-हाथी सफारी की भी सुविधा उपलब्ध है।

जलपाईगुड़ी राजबारी

 जलपाईगुड़ी राजबारी यहां आने वाले सभी पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय स्थलों मे गिना जाता है। राजबारी का मतलब होता है महल, जो कभी रायकाट के स्थानीय शासक बायकुनथपुर एस्टेट का पूर्व निवास था। यह महल अपने ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ अपनी आकर्षक वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। राजबारी में महल भवन, पोर्टिको, दो मंदिर और महल तालाब ‘राजबारी दीघी’ से घिरा विशाल महल उद्यान शामिल है। राजबारी पर्यटकों के लिए 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुला रहता है।

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जलपेश

उपरोक्त स्थानों के अलावा आप जलपेश मंदिर के दर्शन का प्लान बना सकते हैं। जलपाईगुड़ी शहर से लगभग 25 किमी दूर और मिंगुरी से 8 किमी दूर स्थित स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। माना जाता है कि जलपाईगुड़ी शब्द की उत्पत्ति जलपेश शब्द से हुई है। इतिहास के अधूरे पन्नों के अनुसार इस मंदिर की स्थापना बगदाद के अंतिम शासक राजा जलपेश ने 800ईसा पूर्व में की थी । लेकिन बाद में कई राजाओं ने इस मंदिर पर हमला किया और नष्ट कर दिया जबकि कुछ राजाओं ने इसे पुन स्थापित करने की कोशिश की भी। 1665 में कोच राजवंश के राजा प्रणनारायण ने मंदिर की पुन: स्थापना की। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण मंदिर भूकंप के कारण नष्ट हो गया। बाद में इस मंदिर की फिर से स्थापना की गई।

जलपाईगुड़ी का मौसम

 जलपाईगुड़ी का मौसम पूरे साल खुशगवार बना रहता है। घूमने का सबसे अच्छा समय जलपाईगुड़ी घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का होता है।

कैसे पहुंचें जलपाईगुड़ी

 सड़क मार्ग सिलीगुड़ी से 44 किमी दूर जलपाईगुड़ी स्टेट हाइवे 12ए के जरिए पहुंचा जा सकता है।

 ट्रेन द्वारा जलपाईगुड़ी में रेलवे स्टेशन है जो राज्य के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है।

 एयर द्वारा जलपाईगुड़ी का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट सिलीगुड़ी में है। यह एयरपोर्ट भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। साथ यहां से कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी मिलती हैं।

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