पर्यटन यात्रा वृतांत

प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है यह पहाड़ी

तहलका, एमपी-सीजी। बर्फ से ढकी चोटियों वाला यह स्‍थान, भारत के पश्चिम बंगाल राज्‍य में एक सुंदर से हिल स्‍टेशन पर क्षितिज पर स्थित है। कलिम्‍पोंग पर्यटन का सबसे बड़ा तथ्‍य यह है कि यह राजसी हिल स्‍टेशन समुद्र तल से 4000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां ताजा शुद्ध हवा चलती है जो आने वाले हर पर्यटक की छुट्टियों को शानदार बना देती है और यहां पर्यटक बार – बार आना चाहते है। सीधे शब्‍दों में कहें तो कलिम्‍पोंग एक ऐसी जगह पर स्थित है जहां आपको पश्चिम बंगाल की परम्‍परा देखने को मिलती है, वहां की संस्‍कृति, भोजन, के साथ – साथ लोगों का बौद्ध मठ के प्रति झुकाव, आपको कभी नहीं भूलने देता है कि आप हिमालय की तलहटी पर महाभारत पर्वतमाला के बीच में है। प्रकृति प्रेमियों के लिए कलिम्‍पोंग में बहुत सारी खास चीजें है जैसे – क्‍लाउडेड लियोपार्ड, रेड पांडा, साइबेरियन बीजल, बार्किंग डीयर। इस शहर में पक्षियों की भी विस्‍तृत विविधता देखी जा सकती है। अगर आप प्रृकति के और करीब जाना चाहते है तो शहर में स्थित नेओरा राष्‍ट्रीय उद्यान या ऋषि बंकिम चंद्र पार्क की सैर भी एक दिन में कर सकते है। यहां की भूमि पर चीड़ के पेड़ सबसे ज्‍यादा होते है और यह स्‍थान एक आदर्श पिकनिक स्‍थल है। कलिम्‍पोंग में पाएं जाने वाले आर्किड सारी दुनिया में निर्यात किए जाते है जो आपकी गर्लफ्रैंड, पति या पत्‍नी को खुश कर सकते है।

सांस्‍कृतिक रंग में रंगे हुए दो स्‍थल है लेपचा संग्रहालय या जांग ढोल पालरी पोडांग मठ, ये दोनों ही स्‍थल शहर के केंद्र से एक किमी. की दूरी पर स्थित है। य‍ह कोई मायने नहीं रखता है कि आपको पर्यटन में क्‍या चाहिए, कलिम्‍पोंग में सारी उम्र के लोगों के लिए कुछ खास है। यह सिलीगुडी के पास में स्थित है जिससे पर्यटक यहां तक आसानी से सैर के लिए आ सकते है। इस शहर की सैर में कई सुंदर दृश्‍य भी देखने को मिलते है। कलिम्‍पोंग में सभी जगहों पर ब्राडबैंड नेट की जरूरत नहीं पड़ती है, यहां जगह – जगह पर, होटलों आदि में हाई – स्‍पीड इंटरनेट चलता है जिसका फायदा पर्यटक आसानी से उठा सकते है। कलिम्‍पोंग का मौसम गर्मी और वंसत, कलिम्‍पोंग के सबसे अच्‍छे मौसम होते है। इस दौरान यहां के स्‍थानीय निवासियों के लिए सबसे ज्‍यादा रोजगार का समय होता है। कलिम्‍पोंग, भारत और नेपाल के बीच का सबसे महत्‍वपूर्ण व्‍यापार जंक्‍शन है। कलिम्‍पोंग, भारत और चीन के लिए भी व्‍यापार जंक्‍शन का काम करता है। कलिम्‍पोंग पूरे क्षेत्र में एक शिक्षा हब भी है जहां शहर और आसपास के इलाके के बच्‍चे पढ़ने आते है। कलिम्‍पोंग में मौसम का बदलाव बेहद खास होता है, यहां की गर्मियां और सर्दियां, ज्‍यादा और कम रहती है और पर्यटकों के लिए एक सुखद मौसम को बनाती है। मानसून के दिनों में कलिम्‍पोंग की यात्रा न ही करें। क

लिम्‍पोंग के स्‍थानीय लोग, ज्‍यादातर नेपाली है जो भारत की आजादी से पहले नौकरी खोजने की तलाश में यहां आकर बस गए थे। कलिम्‍पोंग के लोग खुले दिमाग के होते है, खुश रहते है और कई त्‍यौहारों का आनंद उठाते है। यहां मनाएं जाने वाले प्रमुख त्‍यौहार दीवाली, दशहरा और क्रिसमिश है। कलिम्‍पोंग, भारत का एक ऐसा स्‍थान है जहां देश की संस्‍कृति देखने को मिलती है। यहां की स्‍थानीय जनता में विभिन्‍न प्रकार के लोग निवास करते है, उसके वाबजूद भी भारत की विशाल संस्‍कृति के दर्शन यहां होते है। यहां की यात्रा के दौरान लेपचा संग्रहालय और जींग ढोक पालरी पोडांग मंदिर की सैर अवश्‍य करें। कलिम्‍पोंग का भोजन भोजन के मामले में, कलिम्‍पोंग सबसे आगे है। यहां के लाजवाब स्‍थानीय भोजन जैसे – मोमोज, चिकन, बीफ, पोर्क या सब्‍जी वाली डिश आदि का स्‍वाद आप सड़क किनारे लगे स्‍टॉल पर उठा सकते है। थुपका यहां की नुडल्‍स आधारित डिश है जिसे सर्दियों के दौरान बनाया जाता है। चुरपी एक स्‍थानीय डिश है जिसे याक के दूध से बनाया जाता है जिसे स्‍टोर करके रखा जाता है। भोजन के साथ – साथ आप यहां द‍ार्जिलिंग की चाय की चुस्कियां भी उठा सकते है, जो आपके अंदर ताजगी भर देती है। कलिम्‍पोंग में गोल्‍फ गोल्‍फ के शौकीन लोगों के लिए कलिम्‍पोंग में कुछ खास है। यहां 18 होल्‍स वाला गोल्‍फ कोर्ट है। गोल्‍फर्स का मानना है कि कलिम्‍पोंग का गोल्‍फ ग्रांउड, दुनिया का सबसे अच्‍छा गोल्‍फ कोर्स है। इस गोल्‍फ कोर्स की देखभाल, भारतीय सेना द्वारा की जाती है। कलिम्‍पोंग तक कैसे पहुंचे कलिम्‍पोंग, सिलीगुडी से राज्‍य राजमार्ग 31 के रास्‍ते पर पास में ही स्थित है, यहां से सड़क के एक घंटे के सफर के बाद आप आसानी से कलिम्‍पोंग पहुंच सकते है। सिलीगुडी एयरपोर्ट से टैक्‍सी भी आसानी से मिल जाती है, पर्यटक चाहें तो कार की भी बुकिंग कर सकते है और कलिम्‍पोंग तक की यात्रा आसानी से कर सकते है।

कलिम्‍पोंग आकर्षण

कैक्‍टस नर्सरी

इस नर्सरी में कैक्‍टस की कई प्रजातियां देखने को मिलेगी। यह स्‍थान, पर्यटकों को कांटो भरे पेड़ों की दुनिया में रूचि पैदा कर सकता है। कलिम्‍पोंग आने वाले पर्यटक, यहां की सैर अवश्‍य करें। यहां की सैर के लिए लगभग 20 रूपए चार्ज देने पड़ते है। यहां पेड़ों का रखरखाव करने वाले लोग, कैक्‍टस को उनके प्राकृतिक आवास में रखने के लिए बहुत प्रयास करते है। फोटो खीचनें के शौकीन लोग यहां आसानी से अपने शौक को नया रूप दे सकते है, अपनी क्रिएटिविटी दिखा सकते है। आप यहां से सस्‍ते दामों पर कैक्‍टस के पेड़, खरीद भी सकते है। इस नर्सरी के मालिक के द्वारा यहां ठहरने की सुविधा भी प्रदान की जाती है।

दिओलो हिल

कलिम्‍पोंग में आकर, दिओलो हिल की सैर वाकई में मन को खुश कर देने वाली होती है। यहां आकर आप घुडसवारी करते हुए शॉपिंग कर सकते है, यहां के शानदार दृश्‍यों को देख सकते है, कलिम्‍पोंग के आकर्षक नजारों को निहार सकते है। पर्यटक यहां आकर, यहां के वातावरण, प्रकृति और माहौल के दीवाने हो जाते है। कलिम्‍पोंग में दिओलो पहाड़ी सबसे ऊंची पहाड़ी है। इसे हिलटॉप पार्क के नाम से भी जाना जाता है।

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तीस्‍ता बाजार

तीस्‍ता बाजार, तीस्‍ता नदी के किनारे पर स्थित है। यह कलिम्‍पोंग से कुछ किमी. की दूरी पर स्थित है और पर्यटकों को यात्रा को आदर्श यात्रा बना देता है। यहां आकर पर्यटक, कलिम्‍पोंग के स्‍थानीय भोजन, सामान, गहने, कपड़े, घरेलू सामान आदि को खरीद सकते है। यहां चाइनीज, तिब्‍बती और भूटानी सामान मिलता है। यहां बिकने वाली चप्‍पलें बेहद सुंदर होती है। इस स्‍थान पर तीस्‍ता नदी में रिवर राफ्टिंग भी कर सकते है।

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जॉग ढोग पालरी फो ब्रांग मठ

बौद्ध मंदिर का वर्णन करने के लिए प्राचीन और शांत, दो शब्‍द पर्याप्‍त होते है। यहां का पूजा हॉल, शांत होता है और पूरा वातावरण बेहद शांतिमय होता है। इस मठ की देखरेख के अभाव के कारण यहां की वास्‍तुकला की चमक खोती जा रही है। इस मठ का नए सिरे से जीर्णोदार किया जा सहा है। इस स्‍थान पर आकर पर्यटक, युवा लामा को देख सकते है जो ऊर्जा से भरपूर और धर्म को दिल से स्‍वीकार करने वाले होते है।

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कलिम्‍पोंग रोमन कैथोलिक चर्च

कलिम्‍पोंग रोमन कैथोलिक चर्च, भारत के उन स्‍थलों में से एक है जहां धार्मिक सद्भाव सबसे ज्‍यादा देखने को मिलता है। यह चर्च बौद्ध मठों, मंदिरों और मस्जिद के बीच स्थित एक उत्‍कृष्‍ट उदाहरण है जो धार्मिक सद्भाव को दिखाता है। अगर आप गाम्‍पस लॉज के आसपास है तो थोड़ी सी दूरी के वॉकिंग डिसटेंस पर आप इस मठ तक पहुंच सकते है। यह चर्च, औपनिवेशिक काल की वास्‍तुकला से बना हुआ है।

कलिम्‍पोंग कला और शिल्‍प केंद्र

रविन्‍द्रनाथ टैगोर को साहित्‍य का गुरू कहा जाता है जिन्‍होने भारतीय राष्‍ट्रगान लिखा था, जो इस संग्रहालय में उनको श्रद्धांजलि देते हुए रखा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से इसे चित्रभानू कहा जाता है, यह स्‍थल टैगोर जी स्‍मृतियों के रूप में प्रसिद्ध है और यहां व्‍यावसायिक प्रशिक्षण केन्‍द्र भी चलाएं जाते है।

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कैसे पहुंचें कलिम्‍पोंग

 सड़क मार्ग कलिम्‍पोंग तक सिलीगुडी से राज्‍य राजमार्ग 31 के रास्‍ते से एक या डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकता है। सिलीगुडी हवाई अड्डे से पर्यटक, टैक्‍सी भी किराए पर ले सकते है या कार को भी हॉयर कर सकते है। ट्रेन द्वारा कलिम्‍पोंग का सबसे नजदीकी रेलवे स्‍टेशन सिलीगुडी और जलपाईगुडी है। एयर द्वारा कलिम्‍पोंग का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट, सिलीगुडी और कोलकाता हवाई अड्डे है जो अंतरराष्‍ट्रीय है।

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