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खुल गया IRCTC का आईपीओ… निवेश करने से पहले जान लें ये बातें..

एजेंसी। 30 सितंबर को नवरात्रों के दूसरे दिन भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी कंपनी आईआरसीटीसी ( इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन ) का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम ( आईपीओ ) खुल गया है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए बाजार से 645 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। कंपनी ने इसके लिए 315 से 320 रुपये का प्राइस बैंड तय कर दिया है। ड्राफ्ट के मुताबिक, कंपनी 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले दो करोड़ एक लाख 60 हजार शेयरों को जारी किया है। कुल शेयरों में से 50 फीसदी शेयर क्वालिफाइड इन्स्टिट्यूश्नल बायर्स ( QIB ) के लिए होंगे। वहीं 15 फीसदी शेयर नॉन-इन्स्टिट्यूश्नल इन्वेस्टर कैटेगरी ( HNI ) के लिए होंगे और 35 फीसदी शेयर रिटेल कैटेगरी के लिए होंगे। 

तीन दिन के लिए खुला आईपीओ 

आईपीओ तीन देन के लिए यानी तीन अक्तूबर तक खुला है। दो अक्तूबर को गांधी जयंती के मौके पर बाजार बंद रहेगा। इसकी शेयर बाजार में लिस्टिंग 14 अक्तूबर को होगी। इस आईपीओ के लीड मैनेजर आईडीबीआई कैपिटल मार्केट एंड सिक्योरिटीज, एसबीआई कैपिटल मार्केट और यस सिक्योरिटीज हैं।

 40 इक्विटी शेयरों के लिए होगी न्यूनतम बोली

एक लॉट 40 इक्विटी शेयरों का है। न्यूनतम बोली 40 इक्विटी शेयरों के लिए होगी। रिटेल निवेशक अधिकतम 16 लॉट खरीद सकते हैं। कंपनी ने 315 से 320 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी ने खुदरा श्रेणी के निवेशकों और पात्र कर्मचारियों के लिए आधार मूल्य पर प्रति शेयर 10 रुपये की छूट की पेशकश की है। यानी छूट के बाद आईआरसीटीसी आईपीओ का दाम 305 से 310 रुपये होगा। ड्राफ्ट रेड हैरिंग प्रोस्पेक्टस के अनुसार आईआरसीटीसी अकेली ऐसी कंपनी है, जिसे भारतीय रेलवे ने कैटरिंग सेवा, ऑनलाइन टिकट बुकिंग और बोतलबंद पानी की सप्लाई के लिए अधिकृत किया हुआ है। आईआरसीटीसी अपने शेयरों को बीएसई और एनएसई पर लिस्टेड करेगी। 

इतना रहा कंपनी का मुनाफा

वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी का कुल राजस्व 1,956.66 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 272.60 करोड़ रुपये रहा था। उसके ऊपर कोई कर्ज नहीं है। कंपनी की शेयर पूंजी 160 करोड़ रुपये और नेट वर्थ 1,042.84 करोड़ रुपये है।

अभी है रेलवे की पूर्ण हिस्सेदारी

आईआरसीटीसी में फिलहाल रेलवे की पूर्ण हिस्सेदारी है। आईपीओ लाने से रेलवे इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को कम कर देगी। केंद्र सरकार भी सभी पीएसयू कंपनियों में हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम कर रही है। इस साल केंद्र सरकार ने विनिवेश के जरिए 1,05,000 रुपये की कमाई करने का लक्ष्य रखा हुआ है। फिलहाल सरकार ने इस तरीके से 12,357.49 करोड़ रुपये कमा लिए हैं।  

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