पर्यटन यात्रा वृतांत

कंचनजंगा की गोद में यह शहर

तहलका, एमपी-सीजी। पहाड़ जिन्हें पसंद होते हैं उनके लिए सिक्किम घूमना किसी जन्नत से कम नहीं। सिक्किम में बहुत से इलाके पहाड़ी है और इनकी ऊंचाई 280 मीटर से 8,585 मीटर तक है। इस राज्य की खूबसूरती इतनी है कि अपनी एक झलक भर दिखा कर किसी का भी दिल मोह सकती है। उत्तर पूर्व के इस राज्य की वैसे तो हर एक जगह देखने लायक है। और बात जब कुछ चुनिंदा जगहों की आती है तो चुनाव करने में मुश्किल होती है।

मंगन

पूर्वी हिमालय की गोद में बसा मंगन देश के टॉप पर्यटक स्थलों में से एक गिना जाता है। ऐसे पर्यटक, जिन्हें छुट्टियों में किसी दिलचस्प, आकर्षक, शांत और प्राकृतिक जगह की खोज रहती है, ये जगह उनके लिए एक तोहफा है। मंगन में बहुत से पर्यटन स्थल हैं जिनमें से एक है शिंगबा रोडोडेंड्रोन सैंक्चुअरी। शिंगबा रोडोडेंड्रोन एक पौधा होता है। इस सैंक्चुअरी में करीब 40 प्रकार के रोडोडेंड्रोन हैं। इतना ही नहीं इस सैंचुअरी में कई प्रकार के पहाड़ी जानवर भी देखने को मिल जाएंगे। इसके अलावा मंगन में सिंघिक गांव है, जो मंगन से करीब 12 किमी दूर है। 500 फीट से भी ज़्यादा ऊंचाई पर स्थित इस गांव से कंचनजंगा के नज़ारे लिए जा सकते हैं।

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गुरूडोंगमर झील

 ये खूबसूरत और लोकप्रीय झील सिक्किम की पवित्र झीलों में से एक है। सिक्किम के गंगटोक से 190 किमी दूर स्थित ये झील, समुद्र तल से 17800 फीट की ऊंचाई पर है। ये झील देखने में इतनी साफ और सुंदर है कि पर्यटक अपनी ट्रैवल लिस्ट में इसे शामिल किए बिना रह नहीं पाते। पर्यटन के नज़रिये से ये झील देखने लायक है। टूरिस्ट इस झील की खूबसूरती का तुत्फ ले सकें, इस बात का ख्याल रखते हुए विभाग ने इसका रख-रखाव बखूबी किया है।

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लाचुंग गांव

वैसे तो गांव कोई भी हो, हमें अच्छा ही लगता है। लेकिन सिक्किम के लाचुंग गांव की बात ही अलग है। यह तिब्बत से लगते उत्तरी सिक्किम में स्थित है। सिक्किम का ये प्यारा सा गांव, 9,600 फुट की ऊंचाई पर लाचेन व लाचुंग नदियों के संगम पर है। यूं तो ये गांव बहुत सुंदर है लेकिन बर्फ गिरने पर तो यहां की सुन्दरता इस हद तक बढ़ जाती है कि इसे शब्दों में बयान करना ज़रा मुश्किल है। तभी तो यहां दुनिया भर से पर्यटकों का तांता लग रहता है। इतनी ही नहीं, यहां का हथकरघा केंद्र, जहां स्थानीय हस्तशिल्प भी देखी जा सकती है।

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युमथांग घाटी

 सिक्किम के उत्तर में स्थित यूमथांग घाटी है जिसे फूलों की घाटी भी कहा जाता है। इस घाटी की सुंदरता देखेंगे तो आप भी मान जाएंगे कि इसे ये नाम देना बिल्कुल गलत नहीं है। फूल तो हर किसी को पसंद होते हैं। फूलों का गुलदस्ता देखते ही सबका दिल बाग-बाग हो जता है। ऐसे में यहां जब फूलों का पूरा बाग ही देखने को मिल जाए तो बात ही क्या है। यूमथांग घाटी में भारी बर्फबारी के कारण इसे दिसंबर से मार्च तक पर्यटकों के लिए बंद रखा जाता है।

लाचेन गांव

 लाचेन एक छोटा सा गांव है जो सिक्कम के उत्तर में स्थित है। लाचेन का अर्थ है ‘बड़ा दर्रा’। ये गंगटोक से लगभग 129 किमी दूर और 2750 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। लाचेन में आप झीलों तक और घाटियों की ट्रैकिंग कर सकते हैं। ट्रैकिंग के दौरन आपको संकरे पहाड़ों पर चलना पड़ सकता है जि लाचेन जैसा पर्यटन स्थल आपके लिए काफी रोमांचकारी हो सकता है।

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थांगू घाटी

थांगू घाटी सिक्किम की सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक है। ये उत्तर लाचेन से 30 किमी दूर है। ये सुंदर घाटी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। हर रोज़ सैकड़ों सैलानी यहां ट्रैकिंग का आनंद लेने आते हैं। पर्यटन के हिसाब से ये जगह एक अच्छा टूरिस्ट प्लेस सिद्ध होती है। इसके अलावा थांगू के आस-पास ग्रीन लेक, चोपटा घाटी जैसी जगहों पर भी ट्रैकिंग की जा सकती है। मार्च से जून के बीच का समय सबसे अच्छा समय है थांगू घाटी घूमने का।

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जैसा कि हमने बताया कि चोपता घाटी थांगू घाटी के ही पास है। सिक्किम की ये घाटी पर्यटकों के लिए एक आदर्श स्थल है कैंपिंग और ट्रैकिंग का। बहुत से सैलानी अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने सिक्किम आते हैं और चोपटा घाटी में कैंपिंग करने का मौका ये कभी नहीं गवाना चाहते, क्योंकि इसकी खूबसूरती है ही ऐसी। बर्फ की चादर में लिपटी ये घाटी किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती।

चुंगथांग

उत्तर सिक्किम का एक छोटा सा लेकिन दर्शनीय शहर चुंगनाथ, सिक्किम के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक है। ये युमथांग के काफी करीब है और गंगटोक से ये करीब 95 किमी की दूरी पर स्थित है। ये लगभग 1790 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक बहुत ही मनमोहक शहर है। पर्यटन के लिए ये शहर एक बार देखना तो बनता है। माना जाता है कि चुंगनाथ में सिख गुरु, श्री गुरुनानक देव जी चीन और तिब्बत जाते समय यहां आए थे। इसलिए चुंगनाथ का नाम पंजाबी भाषा के दो नामों ‘चंगा स्थान’ को जोड़कर रखा गया है। ‘चंगा स्थान’ का अर्थ है, ‘अच्छा स्थान’।

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माउंट कटाओ

 गंगटोक से लगभग 144 किमी दूर और लाचुंग से करीब 28 किमी दूर, माउंट कटाओ एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट है। हालांकि चोटी तक पहुंचने के लिए आपको आर्मी से अनुमति लेनी होगी। जिन्हें साहसिक कार्य और स्पोर्ट्स पसंद है, उनके लिए ये एक आदर्श स्थल है। यहां स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और स्टोन ट्यूबिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया जा सकता है। माउंट कटाओ घूमने का सही समय मार्च से जून के बीच का है लेकिन बर्फ का लुत्फ उठाने के लिए दिसंबर से फरवरी के बीच का समय आदर्श है।

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फेन्सांग मॉनेस्ट्री

 शांति और सुकून किसी पसंद नहीं होता, आखिरकार वही ढूंढने तो हम छुट्टियां बिताने बाहर जाते हैं। ऐसे में सिक्किम के फेन्सांग मॉनेस्ट्री से बेहतर कुछ नहीं। फेन्सांग मठ एक धार्मिक स्थल है। पहाड़ों के ऊपर बसा ये मठ, सिक्किम के बड़े मठों में से एक है। यहां आने पर आपको काफी तादाद में साधु संत मिलेंगे। यहां का शांत वातावरण पर्यटकों को खूब लुभाता है। मार्च-मई और अक्टूबर से दिसंबर के बीच का समय फेन्सांग मॉनेस्ट्री घूमने के लिए पर्याप्त है।

फोडोंग मॉनेस्ट्री

 सिक्किम के उत्तर में स्थित फोडोंग मॉनेस्ट्री गंगटोक से 40 किमी के दूरी पर स्थित है। ये बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सुहावने मौसम के लिए मशहूर है। ज्यादातर पर्यटक गर्मियों से राहत पाने छुट्टियों में यहां के मौसम का लुत्फ लेने आते हैं। इस सुंदर मठ तक सड़क के रास्ते आसानी से पहुंचा जा सकता है। फोडोंग मॉनेस्ट्री घूमने का सही समय मार्च से मई और अक्टूबर से दिसंबर के बीच का है।

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय

सिक्किम जाने का सबसे अच्छा समय मई से लेकर सितंबर के महीने का होता है। इन महीनों के दौरान यहां का अधिकतम तापमान 28-30 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच होता है। इन महीनों में उत्तरी सिक्किम का मौसम ठंडा रहता है। जुलाई और सितंबर के महीनों में यहां हल्की बारिश होती है।

सिक्किम कैसे पहुँचे

सिक्किम का निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा में है जो सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब 124 किमी की दूरी पर स्थित है।सिक्किम में पहला हवाई अड्डा पाक्योंग हवाई अड्डा जिसको साल 2018 में शुरू किया गया है, इस हवाई अड्डे की वाज से राज्य का भारत के दूसरे राज्यों से संपर्क बढ़ा है।

 न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) इसका प्रमुख निकटतम रेलवे स्टेशन है जो सिलीगुड़ी से लगभग 6-7 किलोमीटर और गंगटोक से 130 किमी की दूरी पर स्थित है। बहुत कम ट्रेन सिलीगुड़ी से होकर गुजरती है। आपको सिलीगुड़ी या न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद आगे की यात्रा सड़क मार्ग से से करनी होगी।

31A राष्ट्रीय राजमार्ग गंगटोक को सिलीगुड़ी से जोड़ता है। सड़क मार्ग सिक्किम के लिए जाना आपके लिए बहुत खास साबित हो सकता है क्योंकि तीस्ता नदी के किनारे हरे भरे जंगल और दूसरी तरफ पूर्वी हिमालय श्रृंखला के नजारे आपकी यात्रा को बेहद यादगार बनाते हैं।

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