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काजीरंगा नेशनल पार्क : भारतीय बाघों का घर

काजीरंगा नेशनल पार्क असम के गोलाघाट और नागांव जिले में स्थित एक नेशनल पार्क है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान दुनिया का एक ऐसा नेशनल पार्क हैं। जो एक सींग वाले गैंडों की सबसे अधिक आबादी (दो-तिहाई) के लिए प्रसिद्ध है। बता दें कि इस राष्ट्रीय पार्क को 1985 में विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित किया गया है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की संरक्षित और निरंतर जैव विवधता इसे बेहद खास बनाती है, जिसकी वजह से इस पार्क में कई तरह के जीव पाए जाते हैं। इस पार्क को भारतीय बाघों का घर भी कहा जाता है। काजीरंगा के जल निकाय और जंगल इस पार्क को बेहद खूबसूरत बनाते हैं। जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को एक अलग ही आनंद की प्राप्ति होती है।

काजीरंगा पार्क में पाये जाने वाले जानवर ,

काजीरंगा नेशनल पार्क में एक सींग का गैंडा, जंगली पानी वाली भैंस (वाइल्ड वाटर बफेलो) और पूर्वी दलदली हिरण दुनिया में सबसे अधिक आबादी में पाएं जाने के लिए फेमस है। इस नेशनल पार्क में कुल मिलकर 35 स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं लेकिन इनमें 15 अब खतरें में हैं। इसके अलावा काजीरंगा में पाए जाने वाले अन्य जानवरों में हाथी, गौर, सांभर, जंगली सूअर, बंगाल लोमड़ी, गोल्डन सियार, आलसी भालू, भारतीय मोंटजैक, भारतीय ग्रे नेबला, छोटा भारतीय नेबला के नाम शामिल हैं। इसके साथ एक सींग वाले गेंडे, जंगली जल भैंस, दलदल हिरण, एशियाई हाथी और शाही बंगाल बाघ सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। काजीरंगा में प्रति 5 वर्ग किमी में एक बाघ पाया जाता है। इसके अलावा पार्क में जंगली बिल्लियों की आबादी 118 है। अगर काजीरंगा में पाए जाने वाले पक्षिओं के बारे में बात करें तो इनमे सफेद-सामने वाले हंस, फेरुगिन डक, बेयर पोचर्ड बतख, काले गर्दन वाले सारस, एशियाई ओपनबिल कॉर्क, बेलीथ के किंगफिशर, सफेद बेल वाले बगुले, डालमेशियन पेलिकन, स्पॉट-बिल्व्ड के नाम शामिल हैं। इस नेशनल पार्क में गिद्धों की तीन प्रजातियाँ पाई जाती हैं। जिनके नाम हैं भारतीय गिद्ध (इंडियन वल्चर), दुबले पतले गिद्ध (सिलेंडर बिल्ड वल्चर), इंडियन वाइट वल्चर है।


काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति ,

काजीरंगा में में पाए जाने वाले वनस्पति की समृद्ध विविधता यहाँ हर साल ने वाले पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है इसके साथ उनके मन को एक अलग शांति का अनुभव कराती है। बता दें कि राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ से घिरा हुआ क्षेत्र है जिसकी वजह से यहाँ पाए जाने वाले पौधों, जानवरों और पक्षियों को मदद मिलती है। काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में तीन प्रमुख प्रकार की वनस्पतियां पाए जाते हैं जिनमे कई तरह की घास शामिल हैं। बड़े घास, छोटे घास के अलावा यहाँ पर उष्णकटिबंधीय आर्द्र और सदाबहार वन पाए जाते हैं। यहां पर पाए जाने वाले जलीय वनस्पति जैसे कमल, जलकुंभी और जल लिली आदि इस जगह के वातावरण को बेहद सुंदर बनाते हैं। वर्ष 1986 में किए गए वनस्पतियों के सर्वेक्षण की माने तो यहां पर 41% ऊँचे हाथी घास (टाल एलीफैंट ग्रास), 29% खुले जंगल, 11% छोटी घास, 8% नदियाँ और अन्य जल स्त्रोत, 6% रेत और 4% स्वामपलैंड पाए जाते हैं।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सफारी ,

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले पर्यटक दो तरह की सफारी, हाथी सफारी और जीप सफारी की सुबिधा मिलती हैं। इन दोनों ही सफारी की मदद से आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के जीवजन्तु और जंगलो के आकर्षक दृश्य को देख सकते है।

काजीरंगा नेशनल पार्क में जीप सफारी ,

काजीरंगा नेशनल पार्क में सफारी यात्रा यहाँ आने वाले यात्रियों के लिए मुख्य आकर्षण केंद्र है। यहां आने वाले सभी पर्यटक इस पार्क में जीप सफारी यात्रा करना बेहद पसंद करते हैं। बता दें कि काजीरंगा नेशनल पार्क में दुनिया की सभी लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए संरक्षित वातावरण बनाया गया है। जहाँ आप कुछ लुप्तप्राय पशु, पक्षी और स्तनधारी को देख सकते हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में आप जीप सफारी या आधुनिक एसयूवी सफारी से यात्रा कर सकते हैं। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी में आप यहाँ पाए जाने वाले जानवर जैसे भारतीय गैंडा, जंगली भैंसा, भारतीय हाथी, काला भालू, सांभर, मैकाक, स्लोट बियर, जंगली सूअर, भारतीय तेंदुआ, और कई तरह के पक्षिओं को देख पाएंगे। कांजीरंगा में कई तरह के प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं जो यहाँ का नजारा आकर्षक बनाते हैं। पक्षी और प्रकृति से प्यार करने वाले पर्यटकों के मन जो यह जगह उत्साह से भर देती है। अगर आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी का आनंद लेना चाहते हैं तो बता दें कि इसका समय सुबह 07:00 बजे से 09:30 बजे तक या दोपहर में 1:30 बजे से 3:30 तक है।

काजीरंगा में हाथी सफारी ,

यदि आप काजीरंगा में हाथी पर बैठकर जंगल की सैर करना चाहते हैं, तो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के जंगल में आपको हाथी की सवारी यहाँ पाए जाने वाले गैंडों और अन्य वन्यजीवों का आकर्षक नजारा दिखाएगी। वन विभाग द्वारा काजीरंगा में हाथी सफारी दिन में दो बार (सुबह और शाम) की जाती है। जिसमे एक हाथी सफारी में 4 चार पर्यटकों और एक हाथी चालक को बठने की अनुमति होती है। इस सफारी शुल्क में सवारी शुल्क और प्रवेश शुल्क दोनों शामिल होते हैं।काजीरंगा में हाथी सफारी सुबह 05:30 बजे से 07:30 बजे तक या दोपहर में 3:00 बजे से 4:00 बजे तक की जा सकती है।


काजीरंगा नेशनल पार्क की सैर का सबसे अच्छा समय .


यहां पर घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल के महीने तक का रहता है। असम में मानसून आने पर और मानसून से पहले भारी वर्षा होती है। जिसके चलते ब्रह्मपुत्र नदी अपने उफान पर होती है। इसलिए काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ आ जाती है जिसकी वजह से निचले इलाकों में और मैदानों में पानी भर जाता है। ज्यादा बरसात के समय काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के जानवर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पलायन करते हैं। इसलिए नवंबर से अप्रैल तक काजीरंगा की यात्रा करना आपके लिए बेहद सुखद रहेगा।

कैसे पहुँचें ,


काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जाने के लिए जोरहाट शहर में सबसे निकटतम हवाई अड्डा है जिसकी दूर इस पार्क से 96 किमी है। इसके बाद काजीरंगा के सबसे पास का हवाई अड्डा गुवाहाटी में है जो इससे 225 किलोमीटर दूर है।
रेल से यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए काजीरंगा से सबसे पास का रेलवे स्टेशन फुरकिंग में है जो 80 किमी की दूरी पर स्थित है। यह रेलवे स्टेशन देश के सभी बड़े और प्रमुख शहरों से रेल लाइन से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा काजीरंगा के पास गुवाहाटी रेलवे स्टेशन भी है। काजीरंगा दुनिया के प्रमुख शहरों से नेशनल हाईवे 37 की मदद से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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