पर्यावरण

एक हफ्ते की देरी के साथ केरल पहुँचा मानसून,अच्छी बारिश की उम्मीद

लगभग एक सप्ताह की देरी से मानसून ने आज (8 जून) को केरल तट को हिट कर दिया है। केरल के कई हिस्सों में अच्छी मात्रा में वर्षा होने लगी है। यह प्रचंड गर्मी से झुलसते देश के लिए काफी अच्छी खबर है, क्योंकि पश्चिम और दक्षिण भारत में जलाशयों के जल स्तर के निम्न स्तर पर पहुचने के कारण बड़े भूभाग में कृषि संकट की स्थिति पैदा हो गयी हैं। सिंचाई के पर्याप्त वैकल्पिक स्तोत्रों की कमी के कारण अधिकांश ग्रामीण भारत चार महीने के मानसून के मौसम पर निर्भर करता है, जो वार्षिक वर्षा का अकेले 75 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है।

एक अच्छे मानसून का अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि कृषि भारत की जीडीपी में बहुत बड़ा योगदान देती है। उत्तर भारतीय मैदान, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज किया गया है। राजस्थान के कुछ हिस्सों में तो पारा 50 डिग्री से अधिक हो गया है।
मौसम विभाग ने केरल में बाद मानसून की शुरुआत की घोषणा की, यदि 10 जून तक इन 14 स्टेशनों पर साठ फीसदी – मिनिकॉय, अमिनी, तिरुवनंतपुरम, पुनालुर, कोल्लम, अल्लापुझा, कोट्टायम, कोच्चि, त्रिशूर, कोझीकोड, थलसेरी, कन्नूर, कुडुलु और मंगलौर – लगातार दो दिनों तक 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक की वर्षा होती है तो यह मानसून की शुरुआती सफलता माना जाता है।

आमतौर पर यह माना जाता है कि प्रशांत महासागर के ताप से जुड़े हुए ‘अल-नीनो इफेक्ट’ का मानसून पर प्रभाव पड़ता है। मानसून में देरी का बारिश की मात्रा से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। हालांकि, देश के अन्य हिस्सों में मॉनसून के देरी से आने की वजह से वर्षा में देरी अवश्य होगी। मानसून 18 मई को सबसे पहले, दक्षिण अंडमान सागर में भारतीय आउटपोस्ट पर पहुंचा। पिछले महीने मौसम विभाग ने कहा कि मानसून इसकी सामान्य शुरुआत से छह दिन की देरी के साथ 6 जून को केरल पहुंच जाएगा। हालाँकि इसकी प्रगति के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं थीं।

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