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इस आसन को करने से मजबूत होती है रीढ़ की हड्डी…

वृक्षासन संस्कृत भाषा का शब्द है जहां वृक्ष का अर्थ पेड़ और आसन का अर्थ बैठना या मुद्रा है। जब इस मुद्रा का अभ्यास प्रभावी ढंग से किया जाता है तो यह मुद्रा पेड़ की आकृति का दिखायी देता है, यही कारण है कि इसे वृक्षासन कहा जाता है। इस मुद्रा के दौरान शरीर को ठीक उसी प्रकार स्थिर रखना पड़ता है जैसे पेड़ जमीन पर स्थिर रहता है। वृक्षासन का अभ्यास करते समय हमारा पैर वृक्ष की जड़ों की तरह कार्य करता है और पूरे शरीर के भार को संभाले रखता है। यह आसन स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है।

वृक्षासन करने का सही तरीका

सर्वप्रथम जमीन पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैर एक दूसरे से चिपके हों और घुटने बिल्कुल सीधे रखें।
अपने दोनों हथेलियों को शरीर के दोनों तरफ रखें।
अपने बाएं पैर के घुटने को सीधे रखें और दाएं हाथ से दाएं पैर को उठाकर बाएं पैर के घुटने के जोड़ पर रखें।
इसके बाद अपने दाएं पैर को हल्का सा मोड़ते हुए बाएं घुटने के जोड़ पर आराम से रखें।
आपसे जितना संभव हो सके अपने दाएं पैर की एड़ी को बाएं जंघे पर ऊपर की ओर रखें। आपके पैरों की उंगलियां नीचे की ओर झुकी होनी चाहिए।
आपके दाएं पैर की एड़ी का दबाव बाएं जांघ पर पड़ना चाहिए।
इसके बाद बाएं पैर से अपने शरीर का बैलेंस बनाने की कोशिश करें।
शरीर का संतुलन बन जाने के बाद अपने दोनों हथेलियों और उंगलियों को जोड़ें और दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
आपके दोनों हाथ भगवान को नमस्कार करते हुए मुद्रा में ऊपर की उठा होना चाहिए।
इसके बाद सांस लें और अपने दोनों हाथों को धीरे-धीरे सिर के ऊपर उठाएं।
अपने शरीर को ढीलानहीं बल्कि एकदम तानकर रखें और शरीर का संतुलन बिगड़ने न दें।
कुछ देर तक इसी मुद्रा में बने रहें और सांस छोड़ते हुए हाथों को सीने पर रखें और पहले के पोजिशन में वापस आ जाएं।
इस पोज का अभ्यास अब दूसरे पैर की सहायता से करें। इस क्रिया को बार-बार दोहराएं।

वृक्षासन योग करने का सही समय

वृक्षासन का अभ्यास सुबह के समय एक शांत वातावरण में सही तरीके से करें। सुबह के समय मस्तिष्क अधिक शांत रहता है और आसन के फायदे भी प्रभावी ढंग से प्राप्त होते हैं। किसी भी आसन का अभ्यास सही तरीके से करने पर ही इसके फायदे मिलते हैं। आपको बता दें कि वृक्षासन को खाली पेट किया जाता है और यदि आप भोजन के बाद इस आसन का अभ्यास करना चाहते हैं तो आसन करने से करीब 4 से 6 घंटे पहले भोजन कर लें ताकि भोजन आसानी से पच जाए और आसन के लिए शरीर को सक्रिय बना सके।


वृक्षासन करने के फायदे

वृक्षासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और इससे हड्डियों में दर्द की समस्या नहीं होती है। यह आसन शरीर के संतुलन को भी बनाने में मदद करता है।
यह आसन पैरों के अस्थिबंधन और मांसपेशियों को मजबूत करने में बहुत मदद करता है। वृक्षासन करने से पैरों के घुटने मजबूत होते हैं और कूल्हों के जोड़ लचीले बनते हैं।
वृक्षासन करने से आंख, कान का अंदरूनी हिस्सा और कंधे मजबूत होते हैं। यह आसन कान के लिए फायदेमंद तो होता ही है साथ में साइटिका की बीमारी को भी दूर करने में मदद करता है।
तिदिन इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और काम में ध्यान केंद्रित होता है। यह आसन शरीर को अधिक सक्रिय रखता है और दिमाग को शांत रखता है।
यह आसन सिर से लेकर पैर की उंगलियों तक को स्वस्थ रखने में मदद करता है। शरीर को लचीला बनाने के साथ ही कंधे को मजबूत बनाने और शरीर के विभिन्न विकारों को दूर करने में यह आसन बहुत फायदेमंद होता है।

सावधानियां

यदि आपको अनिद्रा या माइग्रेन हो तो वृक्षासन का अभ्यास न करें।
अगर आपका ब्लड प्रेशर बहुत कम है तो इस स्थिति में भी वृक्षासन का अभ्यास करने से बचें।
यदि आपके घुटनों में दर्द हो तो इस आसन का अभ्यास न करें अन्यथा आपकी परेशानी अधिक बढ़ सकती है।
अगर आपके कूल्हों में चोट लगी हो तो इस स्थिति में वृक्षासन करने से परहेज करें।
यदि आपके टखने में कोई समस्या हो या लगातार चक्कर महसूस होता हो तो वृक्षासन का अभ्यास न करें।

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