पर्यावरण भोपाल मध्यप्रदेश

पर्यावरण के प्रति मूर्तिकार हैं गंभीर, एप्को भी कर रहा प्रेरित

इकोफ्रेंडली गणेश की मूर्तियां बेचने व खरीदने के लिए जागरूकता जरुरी 

सौम्या वर्मा- जफ़र अशरफी, भोपाल, तहलका एमपी-सीजी। 2 सितंबर को गणेश चतुर्थी है, जिसके लिए पूरे देश में जोर-शोर से तैयारियां चल रही है। बुद्धि, ज्ञान और विघ्नविनाशक के रूप में पूजे जाने वाले श्री गणेश जी के स्वागत के लिए इस समय उनके भक्तगण पूरी तरह से तैयार हैं। गणपति बप्पा तो विघ्नहर्ता हैं, वो तो सबकी समस्याओं का अंत करते हैं, तो चलिए इस बार हम इस उत्सव पर पर्यावरण की समस्याओं का भी अंत करने का प्रण लें। ऐसी कामना है कि इकोफ्रेंडली गणेश हमारे साथ-साथ पर्यावरण को भी अपनी कृपा से कृतार्थ करेंगे।

गणेश प्रतिमाओं के मालिक भी कर रहे हैं अपील

भोपाल के शक्ति नगर इलाके में बन रहीं गणेश प्रतिमाओं के पंडाल के मालिक निखिल चंद्रपॉल ने बताया की वे मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाते हैं। वे पर्यावरण के प्रति बहुत सजग हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले 32 सालों से ये काम कर रहे हैं और उनके सारे कारीगर कलकत्ता , बंगाल से हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस वाले गणेश मूर्तिकारों के लिए निखिल का कहना है कि “जानबूझ कर पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाले ऐसे मूर्तिकारों को सजा मिलनी चाहिए। क्योंकि पीओपी वाली गणेश प्रतिमाएं विसर्जन के बाद पानी में घुलती नहीं हैं और ये पानी के जीवों से लेकर इंसानों तक के लिए हानिकारक होती है। इस तरह ये प्रकृति और वातावरण को ख़ासा नुक़सान पहुँचाती है।” हालाँकि सरकार पिछले कई सालों से इस ओर काम कर रही हैं और पीओपी वाली मूर्ति बनाने पर कड़ी रोक भी लगा चुकी है। इसके बावजूद लोग इसको गंभीरता से नहीं लेते। निखिल का कहना है कि “ऐसे मूर्तियों को बनाने वालों से ज्यादा उनको खरीदने वाले दोषी हैं। अगर पर्यावरण बचाना है तो सभी को मिलकर इस दिशा में कदम बढ़ाने होंगें। पंडाल में काम कर रहे कारीगरों और मूर्तिकारों ने बताया कि मिट्टी की प्रतिमाओं में रंग भरना या उन्हें रूप देना पीओपी की मूर्ति से ज्यादा कठिन है पर इससे पर्यावरण बचता है, इसीलिए थोड़ी सी मेहनत न करने के लिए पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए।” 

एप्को की कार्यशालाएं लोगों को कर रही है जागरूक

गणेश उत्सव पर्यावरण से जुड़ा हुआ महोत्सव है इसीलिए इस सिलसिले में भोपाल के ‘पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन’ यानी एप्को के एक्सिक्यूटिव डायरेक्टर ‘जीतेन्द्र सिंह राजे’ से बात की। उन्होंने बताया कि “एप्को इस दिशा में बहुत काम कर रहा है। जो एक नवाचार है और 4 सालों से लगातार चल रहा है। एप्को पिछले कई हफ़्तों से स्कूल, कॉलेज और जगह- जगह कार्यशालाएं कर के लोगों को जागरूक कर रहा है। जीतेन्द्र सिंह ने बताया कि इन कार्यशालाओं में वे लोगों को बताते हैं कि वे अपनी धार्मिक आस्था को रखते हुए किस तरह से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ये उत्सव मन सकते हैं। एप्को कई जिलों में जाकर बच्चों को भी मिट्टी के गणेश बनाने के लिए कहता है और उन्हें अपने घर में ही विसर्जित करने की विधि भी बताता है। उन्होंने बताया की एप्को पहले भोपाल में ही ऐसी कार्यशालाएं करता था,जो अब जिलों और दूसरे शहरों में भी की जानें लगीं हैं। श्री सिंह ने कहा कि पीओपी के बाजार पर ताला लगाने का सबसे अच्छा तरीका यही है की मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाई जाएं और इसके लिए सभी को जागरूक किया जाए।” 

इस बारें में एप्को के कार्यपालन यंत्री ‘राजेश रायकवार’ ने जानकारी दी कि वे इन कार्यशालाओं में लोगों को बताया है कि मूर्ति केवल मिट्टी की ही लेकर आएं गणेश जी की प्रतिमाओं को घर में ही विसर्जित करें। उन्होंने लोगों से पीओपी के गणेश जी न खरीदने की अपील की है। उनका कहना है कि “ये मूर्ति तरह -तरह के रासायनिक रंगों से बनाई जातीं हैं और पानी में न घुलने के कारण प्रकृति को नुकसान पहुँचाती हैं। हाल ही में एप्को ने इंदौर में 2 स्कूलों में , उज्जैन में 2 और भोपाल में 2 शासकीय स्कूलों के साथ कई जगह कार्यशालाएं आयोजित कीं।” इस प्रकार एप्को ने लगभग 3000 बच्चों व छात्र-छात्राओं  को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि “एप्को मूर्तिकारों की भी कार्यशाला आयोजित कर रहा है अभी मंडीदीप में मंगलम सेरेनेक फैक्ट्री में वहां के श्रमिकों के लिए भी एप्को ने कार्यशाला आयोजित की थी। इन कार्यशालाओं में वे श्रमिकों को विसर्जन से पहले और विसर्जन के बाद पानी की रिपोर्ट भी दिखाते हैं, जिससे उन्हें प्रकृति को पहुंची क्षति का पता चलता है। इसके अलावा शाहपुरा में ए सेक्टर में माहेश्वरी समाज और कालोनी कार्यशाला आयोजित की जाती है।” 

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