भोपाल मध्यप्रदेश

एसपीए की छात्रा ने सिलेंडर का नोजल मुंह में लेकर ऑर्गन गैस इन्हेल कर की खुदकुशी

शहर में अपनी तरह का पहला मामला

भोपाल, तहलका एमपी-सीजी। खजूरी सड़क के भौंरी स्थित राष्ट्रीय स्तर के संस्थान स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर(एसपीए) की फाइनल ईयर की छात्रा ने शनिवार रात संस्थान के कैंपस स्थित गर्ल्स हॉस्टल में खुदकुशी कर ली। छात्रा ने खुदकुशी करने के लिए आर्गन गैस सिलेंडर का उपयोग किया। इस सिलेंडर का नोजल मुंह में लेकर ऑर्गन गैस इन्हेल की जिससे उसकी मौत हो गई। यह गैस वेल्डिंग के दौरान उपयोग में लाई जाती है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मुंबई से आए उसके चचेरे भाई शव को विमान से सिल्चर (असम) के लिए लेकर रवाना हो गया है। थाना प्रभारी एलडी मिश्रा के मुताबिक, मूलत: सिलचर, असम निवासी 24 वर्षीय प्रियाली डे एसपीए में फाइनल ईयर की छात्रा थी। वह संस्थान के कैंपस स्थित गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। शनिवार की दोपहर करीब 4 बजे तक सहेलियों ने उसे घूमते देखा था। प्रियाली के बगल के ही कमरे में रहने वाली छात्राएं मार्केट गई हुई थीं। रात करीब 11 बजे छात्राओं ने प्रियाली का कमरा अंदर से बंद होने पर उसे आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

इस पर बगल के कमरे की बालकनी से चढ़कर छात्राओं ने टार्च जलाकर देखा तो प्रियाली बिस्तर पर बेसुध हालत में पड़ी हुई थी। प्रियाली के चेहरे पर पालीथीन जैसी वस्तु लिपटी दिखी। छात्राओं ने तुरंत वार्डन को सूचना दी। कमरे का दरवाजा तोड़कर हॉस्टल की एंबुलेंस से उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया है कि गोवा में उसका दो-तीन बार एक्सीडेंट हो चुका है। उसके पास से कई दवाएं भी मिली हैं।
सिल्चर में है पिता का कारोबार… थाना प्रभारी एलडी मिश्रा के अनुसार प्रियाली के पिता संतोष डे का सिल्चर में स्वयं का कारोबार है। प्रियाली तीन बहनों में दूसरे नंबर की थी। पुलिस ने परिजनों को सूचना दी थी। मुंबई से उसका भाई आदित्य शव को विमान से लेकर सिल्चर (असम) रवाना हो गया है। पुलिस को एक पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें छात्रा ने लिखा कि मेरी सोचने-समझने की क्षमता नहीं बची। मैं लाइफ से थक चुकी हूं। मैं जीना नहीं चाहती, जो कर रही हूं सोच समझकर कर रही हूं। मेरे आर्गन डोनेट कर दिए जाएं।

आनलाइन बुलाया था सिलेंडर

थाना प्रभारी मिश्रा के मुताबिक प्रियाली खुदकुशी की प्लानिंग पहले ही कर चुकी थी। उसने 23 अगस्त को आॅनलाइन आर्गन गैस सिलेंडर बुलाया था। वह बाजार से उसका नोजल और पाइप भी खरीदकर लाई थी। पुलिस को उसके कमरे से बिल भी मिले हैं। पुलिस खुदकुशी के कारणों की जांच कर रही है। आर्गन गैस का इस्तेमाल वेल्डिंग और आयरन कटिंग में इस्तेमाल किया जाता है। जहरीली गैस से लंग्स काम करना बंद कर देते हैं। एफएसएल सागर के डायरेक्टर डाॅ. हर्ष शर्मा के अनुसार जहरीली गैस शरीर के अंदर जाने से फेफड़ों को प्रभावित कर देती है। इससे फेफड़े पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं, जिससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

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