पर्यटन

राधा और कृष्ण की पूजा के लिए समर्पित वृंदावन धाम

वृंदावन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है। यह ब्रज भूमि क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में से एक है। हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के दिन यहीं बिताए थे। यह शहर मथुरा से लगभग 10 किमी दूर है, आगरा-दिल्ली राजमार्ग  पर कृष्ण की जन्मस्थली है। वृंदावन धाम राधा और कृष्ण की पूजा के लिए समर्पित है और कई मंदिरों की मेजबानी करता है। वृंदावन को वैष्णववाद द्वारा पवित्र माना जाता है। वैसे तो वृंदावन धाम में पूरे वर्ष भर पर्यटक आते हैं लेकिन कृष्ण जन्माष्टमी के समय कृष्ण की बाल लीलाओं और झांकियों को देखने के लिए यहां भारी भीड़ जुटती है। आज हम कृष्ण की नगरी, वृन्दावन की सैर पर चलते हैं जो पुरे साल कृष्ण भक्ति में लीन रहता है । वृन्दावन में कई ऐसे आकर्षक केंद्र हैं जो भारत ही नहीं दुनिया भर में रहने वाले कृष्ण भक्तों को हर साल अपनी ओर खींचते हैं। चलिए इन्हीं आकर्षक केंद्रों के नज़ारों से रूबरू होते हैं।

वृन्दावन में घूमने की जगह 
प्रेम मन्दिर 

 वृंदावन में स्थित यह भव्य धार्मिक मंदिर राधा कृष्ण और सीता राम को समर्पित है। सफेद संगमरमर से निर्मित और बहुत जटिल नक्काशी से सजी, यह मंदिर अपनी स्थापत्य सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। जब भी आप वृन्दावन में घूमने जाएं तो प्रेम मंदिर को देखना ना भूलें।प्रेम मन्दिर के निर्माण में 11 साल का समय और लगभग 100 करोड़ रुपए की धन राशि लगी है। इसमें इटैलियन करारा संगमरमर का प्रयोग किया गया और इसे राजस्थान और उत्तरप्रदेश के एक हजार शिल्पकारों ने मिलकर बनाया था। यह मन्दिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनर्जागरण का एक नमूना है। 

इस्कॉन मंदिर
1975 में बने इस्कॉन मंदिर को श्री कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर को 1975 में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के निर्देश पर बनाया गया था। वृंदावन में स्थित यह भव्य मंदिर देखने लायक है। जब भी आप वृन्दावन धाम की यात्रा पर जाएं तो इस्कॉन मंदिर को देखना ना भूलें। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर ठीक उसी जगह पर बना है, जहां आज से 5000 साल पहले भगवान कृष्ण दूसरे बच्चों के साथ खेला करते थे। 

बाँके बिहारी मंदिर 
वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जिसे प्रचीन गायक तानसेन के गुरू स्वमी हरिदास ने बनवाया था। भगवान कृष्ण को समर्पित इस मंदिर में राजस्थानी शैली की बेहतरीन नक्काशी की गई है।यह मंदिर वृंदावन में स्थित है भगवान कृष्ण को समर्पित देश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। यह मंदिर राजस्थानी शैली में बना है और मंदिर में भगवान कृष्ण की छवि एक बच्चे के रूप में दिखाई देती है। जब भी आप वृन्दावन में घूमने जाएं तो बांके बिहारी मंदिर को देखना ना भूलें।

कात्यायनी शक्तिपीठ वृन्दावन
कात्यायनी पीठ मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है और इसे उमा शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है। यह वृंदावन में भूतेश्वर महादेव मंदिर के भीतर स्थित है। वृंदावन धाम के मंदिर में यह मंदिर देखने लायक है।

निधिवन मंदिर
निधिवन मंदिर भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध लीला स्थलियों में से एक है। यह धार्मिक नगरी मथुरा में वृन्दावन के प्रसिद्ध स्थलों में से है। श्री राधारानी की अष्टसखियों में प्रधान ललिता सखी के अवतार रसिक संत संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदासजी महाराज की यह साधना स्थली है।

मदन मोहन मंदिर
मदन मोहन जी का मंदिर वृंदावन में स्थित एक वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है।निमार्ण के समय और शिल्पियों के संबन्ध में कुछ जानकारी नहीं है। प्रचलित कथाओं में आता है कि राम दास खत्री व्यापारी की व्यापारिक सामान से लदी नाव यहाँ यमुना में फंस गयी थी। जो मदन मोहन जी के दर्शन और प्रार्थना के बाद निकल गयी। 

केसी घाट
 ऐसा माना जाता है कि वृंदावन में ही भागवान कृष्ण ने बचपन का अधिकांश समय बिताया था। इसी मान्यता अनुसार केसी घाट पर ही भगवान कृष्ण दुष्ट राक्षस केशी से लड़े थे और अपने मित्रों व समुदाय को उनकी दुष्टता से बचाया था। आज भी केसी घाट इस घटना को अपने हृदय में समाए हुए विराजमान है।  

गोविंद देव जी मंदिर
गोविन्द देव जी का मंदिर वृंदावन में स्थित वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। मंदिर की भव्यता का अनुमान इस उद्धरण से लगाया जा सकता है कि जब औरंगज़ेब ने शाम को टहलते हुए, दक्षिण-पूर्व में दूर से दिखने वाली रौशनी के बारे जब पूछा तो पता चला कि यह चमक वृन्दावन के वैभवशाली मंदिरों की है। 

 श्री वृंदाकुंड वृंदा कुंड
 वही जगह है जहाँ वृंदा देवी रोज़ बैठ कर राधा और कृष्ण द्वारा बिताये जाने वाले दिनों के बारे में विचार करते थीं। यहाँ स्थित मंदिर में वृंदा देवी की एक सुन्दर प्रतिमा भी स्थापित है।

 पागल बाबा मंदिर
 मथुरा से वृंदावन के मार्ग में फूल की आकृति में एक विशाल संगमरमर का मंदिर है, जो देखने में काफी सुंदर है। इसे पागल बाबा का मंदिर कहा जाता है। दस मंजिला इस विशाल मंदिर की सुंदरता में आप खो जायेंगे।  

कुसुम सरोवर
कुसुम सरोवर गोवर्धन से लगभग 2 किलोमीटर दूर राधाकुण्ड के निकट स्थापत्य कला के नमूने का एक समूह जवाहर सिंह द्वारा अपने पिता सूरजमल की स्मृति में बनवाया गया। ई. 1675 से पहले यह कच्चा कुण्ड था जिसे ओरछा के राजा वीर सिंह ने पक्का कराया उसके बाद राजा सूरजमल ने इसे अपनी रानी किशोरी के लिए बाग़-बगीचे का रूप दिया और इसे अधिक सुन्दर और मनोरम स्थल बना दिया।

घूमने का सबसे अच्छा समय
वृंदावन जनवरी से मार्च और अक्टूबर से दिसंबर के दौरान आने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। इन महीनों के दौरान मौसम सौम्य और सुखद रहता है और वृंदावन के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए आदर्श समय होता है

वृंदावन  कैसे पहुंचें
यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा में है जो वृंदावन से 10 किमी दूर स्थित है। मथुरा कैंट और मथुरा जंक्शन के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं। स्टेशन पहुंचने के बाद आप टैक्सी या मोटर रिक्शा से वृंदावन धाम पहुंच सकते हैं।वृंदावन में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा में है जो वृंदावन से 10 किमी दूर स्थित है। मथुरा कैंट और मथुरा जंक्शन के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं।यहां का निकटतम बस स्टैंड मथुरा है, जो वृंदावन से 10 किमी दूर है। यहां आप दिल्ली से बस द्वारा आ सकते हैं। इसके अलावा भरतपुर और राजस्थान मथुरा से 45 किमी दूर है जहां से नियमित बसें आती हैं।

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